हत्या के मामले में गलत शपथ पत्र देना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने बस्ती एसपी को दी अदालत में खड़े रहने की नसीहत
बस्ती पुलिस की लापरवाही पर भड़का हाईकोर्ट; एसपी को लगी फटकार, चार घंटे तक कोर्ट में रहना पड़ा खड़ा
अजीत मिश्रा (खोजी)
इलाहाबाद हाईकोर्ट में बस्ती पुलिस की किरकिरी: लापरवाही पर एसपी को 4 घंटे मिली ‘सजा’, कोर्ट उठने तक खड़े रहे
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
- बस्ती SP को हाईकोर्ट की फटकार: 4 घंटे तक अदालत में खड़े रहे कप्तान
- हाईकोर्ट सख्त: बस्ती पुलिस की लापरवाही पर एसपी ने मांगी बिना शर्त माफी
- हत्याकांड की जांच में लापरवाही: हाईकोर्ट ने बस्ती एसपी को दी अनोखी सजा
- बस्ती: वाल्टरगंज हत्याकांड में पुलिस की बड़ी लापरवाही, हाईकोर्ट ने एसपी को किया तलब
- बस्ती पुलिस के गलत तथ्यों पर हाईकोर्ट नाराज, कप्तान यशवीर सिंह को कोर्ट में दी गई सजा
प्रयागराज/बस्ती। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक संवेदनशील मामले में बस्ती पुलिस की कार्यप्रणाली और घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बस्ती के पुलिस अधीक्षक (SP) यशवीर सिंह को फटकार लगाते हुए चार घंटे तक अदालत में खड़े रहने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि जिले के प्रभारी को अपने मातहतों द्वारा दी गई जानकारियों और हलफनामों के प्रति पूरी तरह सचेत रहना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
मामला 25 सितंबर, 2025 का है, जब बस्ती के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र में एक युवती की नृशंस हत्या कर दी गई थी। परिजनों का आरोप था कि शादी से इनकार करने पर मनजीत कुमार और तीन अन्य ने युवती पर ईंट से हमला किया और उसके मुंह में जहर डाल दिया।
इस मामले में पुलिस की कार्यशैली शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही:
- FIR में देरी: घटना के 17 दिन बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।
- विरोधाभासी रिपोर्ट: पुलिस ने दावा किया कि युवती पर भारी प्रहार हुआ, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गंभीर चोट के स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले।
- न्यायिक प्रक्रिया में सुस्ती: कोर्ट द्वारा मांगी गई ‘पैरा-वाइज’ टिप्पणी भेजने में पुलिस ने अत्यधिक देरी की।
कोर्ट में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिखे अधिकारी
सुनवाई के दौरान जब देरी का कारण पूछा गया, तो वाल्टरगंज थानाध्यक्ष उपेंद्र सिंह और विवेचक मनोज यादव ने इसका ठीकरा अभियोजन अधिकारी पर फोड़ दिया। इस पर कोर्ट ने अभियोजन अधिकारी राजीव कुमार को भी तलब किया। अंततः, मामले की गंभीरता और पुलिस के ढुलमुल रवैये को देखते हुए कोर्ट ने 7 अप्रैल, 2026 को एसपी बस्ती को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था।
एसपी की माफी और कोर्ट की नसीहत
16 अप्रैल, 2026 को एसपी यशवीर सिंह और अभियोजन अधिकारी कोर्ट में पेश हुए। गलत तथ्यों के साथ शपथ-पत्र दाखिल करने और लापरवाही पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई।
कोर्ट की टिप्पणी: > “जिस व्यक्ति के पास पूरे जिले का प्रभार है, उसे अपने इंस्पेक्टर या सिपाही द्वारा दी गई जानकारी के प्रति सचेत रहना चाहिए। भविष्य में शपथ-पत्र दाखिल करते समय अधिक सावधानी बरतें।”
हालांकि, एसपी द्वारा बिना शर्त माफी मांगने पर कोर्ट ने नरम रुख अपनाया, लेकिन सांकेतिक कार्रवाई के तौर पर उन्हें कोर्ट उठने तक (लगभग 4 घंटे) वहीं खड़े रहने का निर्देश दिया।
मुख्य आरोपी को मिली जमानत
केस की मेरिट पर विचार करते हुए अदालत ने पाया कि मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी पुलिस के दावों का समर्थन नहीं कर रही है। साक्ष्यों के अभाव और संदेह की स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने मुख्य आरोपी मनजीत कुमार को सशर्त जमानत दे दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और ट्रायल में पूरा सहयोग करेगा।















